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घर वापसी
बस अचानक झटके से रुकी।
नंदिनी की आँख खुली—दिल तेज़ धड़क रहा था।
एक पल के लिए उसे समझ ही नहीं आया कि वह कहाँ है।
फिर बाहर देखा… पुराना बस अड्डा।
और सब याद आ गया।
वह घर लौट आई थी।
रात के ग्यारह बजे थे।
पीली रोशनी में डूबा हुआ भोपाल का बस स्टैंड वैसा ही था—जैसे उसने छोड़ा था।
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