
कुछ कहानियाँ पूरी नहीं होतीं… वे बस हमारे भीतर चलती रहती हैं। नंदिनी शर्मा ने हमेशा सोचा था कि ज़िंदगी उसके नियंत्रण में है। दिल्ली की नौकरी, अपनी आज़ादी, अपने फैसले। लेकिन एक फोन कॉल… और सब कुछ बदल गया। बीमार माँ। खामोश होते पिता। पुरानी गली। और एक अधूरा रिश्ता — जो कभी खत्म नहीं हुआ। जब नंदिनी अपने घर लौटती है, तो उसे सिर्फ अपने परिवार का सामना नहीं करना पड़ता… बल्कि खुद से भी। क्या वह अपने डर से बाहर निकल पाएगी? क्या वह सही और आसान के बीच फर्क कर पाएगी? और सबसे बड़ा सवाल — क्या हर अधूरी कहानी को पूरा होना ज़रूरी होता है? "टूटे हुए आसमान के नीचे" एक ऐसी कहानी है जो आपके दिल में उतरती है… और शायद कुछ सवाल हमेशा के लिए छोड़ जाती है।
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