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दो किनारे

Chapter 3 · Devuu

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दो किनारे

hindi

फोन बजा।

सुबह के सन्नाटे में वह आवाज़ ज़्यादा तेज़ लगी।

नंदिनी आँगन में बैठी थी।

धूप अभी हल्की थी।

माँ तुलसी में पानी दे रही थीं।

सब कुछ शांत था।

पर उसके अंदर—

कुछ भी शांत नहीं था।

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