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पुनर्जन्म
भाग 1: अंधेरे में एक रोशनी
छह महीने बीत चुके थे। अर्जुन एक फुटपाथ पर रह रहा था। नशे की लत में डूबा, कभी-कभार जेब काटकर खाता। उसकी दाढ़ी बढ़ गई थी, बाल उलझ गए थे। कोई उसे पहचान नहीं सकता था।
एक रात, एक बूढ़ा आदमी उसके पास बैठा।
"बेटा, तुम्हारी आँखों में वही आग है जो मैंने 30 साल पहले देखी थी।"
अर्जुन ने उसे घृणा से देखा। "चले जाओ बुजुर्ग। मुझे किसी की नहीं सुननी।"
"मैं भी एक वकील था," बूढ़े ने कहा। "एक ईमानदार वकील। फिर सिस्टम ने मुझे तोड़ दिया। मेरा बेटा, मेरी पत्नी... सब कुछ छीन लिया।"
अर्जुन की आँखें चौड़ी हुईं।
"मैंने 20 साल लड़ाई लड़ी," बूढ़ा आदमी कहता रहा। "फिर समझ आया - यह सिस्टम कानून से नहीं, ताकत से चलता है। जो ताकतवर है, वही कानून है।"
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