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उसने 8 साल इंतज़ार किया उससे शादी करने के लिए शादी के दिन जो हुआ, सबकी आंखें नम हो गईं
आठ साल के इंतज़ार के बाद हुई शादी की सच्ची लगने वाली भावुक कहानी, जो सच्चे प्यार और त्याग की मिसाल है।
कबीर और नैना की मुलाकात कॉलेज के पहले साल में हुई थी, एक बारिश की दोपहर, जब दोनों एक ही छाते के नीचे खड़े होकर बस का इंतज़ार कर रहे थे।
"आप हमेशा इतनी देर से क्लास आती हैं?" कबीर ने मज़ाक में पूछा।
"आप हमेशा इतने सवाल पूछते हैं?" नैना ने हंसते हुए जवाब दिया।
उस दिन की छोटी सी मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई, और फिर दोस्ती प्यार में। कॉलेज के तीन साल दोनों ने साथ बिताए — लाइब्रेरी में साथ पढ़ाई करते, कैंटीन में साथ चाय पीते, और भविष्य के सपने साथ बुनते।
लेकिन जिंदगी ने उनके लिए कुछ और ही लिखा था।
कॉलेज खत्म होने के कुछ महीने बाद, नैना के पिता का अचानक देहांत हो गया। नैना घर में सबसे बड़ी संतान थी, और उसके नीचे दो छोटे भाई-बहन थे, जो अभी स्कूल में पढ़ते थे। मां की तबीयत पहले से ही ठीक नहीं रहती थी। घर की पूरी ज़िम्मेदारी अचानक नैना के कंधों पर आ गई।
"कबीर, मुझे माफ़ कर दो," नैना ने रोते हुए कहा। "मैं अभी शादी के बारे में सोच भी नहीं सकती। मुझे अपने भाई-बहनों को पढ़ाना है, मां का ख्याल रखना है।"
"मैं कहां जल्दी में हूं?" कबीर ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा। "मैं इंतज़ार करूंगा। जितना लगे, उतना।"