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सपनों का किराएदार

By Devuu · 5 min read

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सपनों का किराएदार

hi

एक व्यक्ति हर रात अनजान स्त्री के सपने में जाता है और उसके अधूरे प्रेम व विदाई का हिस्सा बन जाता है।

रात के साढ़े ग्यारह बजे थे जब **अनिकेत** की आँख लगी।

वह हर रात की तरह सोया — थका हुआ, अकेला, बेमन।

पर उस रात कुछ अलग हुआ।

वह अपने कमरे में नहीं, किसी और के घर में था।

एक पुरानी बालकनी, टूटी हुई कुर्सी, और सामने एक स्त्री — जिसे उसने कभी नहीं देखा था।

वह स्त्री चाय बना रही थी और खुद से बातें कर रही थी, जैसे कोई उसके सामने बैठा हो।

अनिकेत को समझ नहीं आया — यह उसका सपना है, या किसी और का?

सुबह जब आँख खुली, तो वही चेहरा उसकी आँखों में अटका रहा।

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