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संघर्ष की मिट्टी
एक गरीब गाँव के लड़के अर्जुन की प्रेरक कहानी, जो मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन से इंजीनियर बनने का सपना पूरा करता है।
रामपुर गाँव में एक लड़का रहता था, नाम था अर्जुन। उम्र यही कोई अठारह साल। पिता खेतों में मज़दूरी करते थे, माँ दूसरों के घरों में बर्तन माँजती थी।
अर्जुन पढ़ने में तेज़ था। लेकिन गाँव के स्कूल में सुविधाएँ नहीं थीं। न ढंग की किताबें, न अच्छे शिक्षक।
एक दिन गाँव में शहर से एक इंजीनियर आया। नाम था विक्रम सिंह। वो अपने पुराने गाँव के कुएँ की मरम्मत करवाने आया था।
अर्जुन उसे देखता रहा। उसकी गाड़ी, उसके कपड़े, उसका आत्मविश्वास। सब कुछ अलग था।
"आप क्या करते हैं शहर में?" अर्जुन ने हिम्मत करके पूछा।
"मैं इंजीनियर हूँ। पुल बनाता हूँ, इमारतें बनाता हूँ।"
"आप भी तो हमारे गाँव से हैं ना?"
विक्रम मुस्कुराया। "हाँ, इसी गाँव से। तुम्हारी तरह इसी स्कूल में पढ़ा हूँ।"