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स्मृति चोर
भविष्य के शहर में यादें चुराने वाला एक रहस्यमय अपराधी, अमरता की चाहत में इंसानों की स्मृतियाँ मिटाता है — एक रोमांचक साइ-फाई क्राइम कहानी।
साल 2094 था।
नैनीताल की पुरानी पहाड़ियों पर अब कांच के गुंबदों वाला शहर बस चुका था — "नवगिरि"।
यहाँ हर इंसान के दिमाग में एक छोटा-सा चिप लगा होता था, जिसे "स्मृति-कोष" कहा जाता था।
यह चिप हर व्यक्ति की यादों को कॉपी करके सुरक्षित रखता था, ताकि अगर किसी दुर्घटना में असली दिमाग को नुकसान पहुँचे, तो यादें फिर से लौटाई जा सकें।
इंस्पेक्टर अरुण चौधरी नवगिरि पुलिस के "स्मृति अपराध विभाग" में काम करता था।
यह विभाग सिर्फ एक तरह के अपराध की जाँच करता था — स्मृति-चोरी।
उस रात अरुण के डेस्क पर एक अजीब सूचना आई।
शहर के सबसे बड़े वैज्ञानिक, डॉक्टर विक्रम सहगल का स्मृति-कोष खाली मिला था।