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नदी का रहस्य
प्राचीन नगर मृगपुरम में नदी सूख गई है एक युवा पुरोहित तारों के रहस्य से ज़मीन के भीतर छिपा जल खोजकर पूरे नगर को..
सिंधु के किनारे बसा नगर "मृगपुरम" कभी इतना समृद्ध था कि लोग कहते थे यहाँ की मिट्टी में भी सोना उगता है।
पर वह समय अब बीत चुका था।
तीन वर्ष से बारिश ने मुँह मोड़ लिया था। नदी की धारा पतली होते-होते अब एक नाले जैसी रह गई थी।
लोग रोज़ सुबह नदी किनारे जाकर पानी की गहराई मापते, और रोज़ निराश होकर लौटते।
नगर की मुख्य पुरोहित थी **अवंतिका**। उम्र में पच्चीस बरस, पर आँखों में सौ बरस का अनुभव।
अवंतिका का काम केवल यज्ञ करना नहीं था। वह तारों को पढ़ती थी। रात के आकाश में वह वो रास्ता ढूँढती जो उसके पूर्वजों ने पत्थरों पर उकेरा था।
उसके पिता, जो पहले पुरोहित थे, मर चुके थे — भूख से नहीं, बल्कि उस निराशा से जो हर रात नगर को खाए जा रही थी।
"पानी नहीं है तो देवता रूठ गए हैं," नगर के बुज़ुर्ग यही कहते।