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हरा मतलब चलो एक अद्वितीय डरावनी कहानी
कुछ रोशनियाँ सिर्फ़ दिखती नहीं, बुलाती हैं। और जब हरी बत्ती बुला ले, रुकना मना है।
राघव को उस मकान की चाबी मिली तो शाम हो चुकी थी।
पुलिस वाले जा चुके थे।
फोरेंसिक टीम भी।
बचा था सिर्फ़ खून, बदबू, और एक अजीब सा सन्नाटा।
राघव का काम था सफ़ाई करना। वो एक क्राइम सीन क्लीनर था। मुंबई के उन चंद लोगों में से जो मरने के बाद की गंदगी साफ़ करते हैं।
उसने गेट खोला।
मकान पुराना था। ब्रिटिश ज़माने का। बांद्रा में एक ऐसी गली में जहाँ सूरज की रोशनी भी झिझकती थी।
अंदर अँधेरा था।
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