ReadNovaX edition
गरीब चौकीदार ने पाला अनजान बच्ची को अपनी बेटी की तरह 15 साल बाद जो हुआ उसने सबको रुला दिया
एक चौकीदार और एक अकेली बच्ची की भावुक कहानी जो 15 साल बाद एक चमत्कारी मोड़ लेती है दिल छू लेने वाली कहानी
मुंबई के एक पॉश इलाके में "ग्रीनवुड अपार्टमेंट्स" नाम की एक बड़ी सोसाइटी थी। उसी सोसाइटी के गेट पर रामू काका पिछले बीस सालों से चौकीदारी करते थे। उनकी उम्र साठ के करीब थी, पत्नी का देहांत कई साल पहले हो चुका था, और उनकी कोई औलाद नहीं थी। सोसाइटी के लोग उन्हें सिर्फ एक चौकीदार समझते थे — कोई उनकी तरफ ज़्यादा ध्यान नहीं देता था।
उसी सोसाइटी के फ्लैट नंबर 402 में मेहरा परिवार रहता था। मिस्टर और मिसेज़ मेहरा दोनों बड़ी कंपनियों में उच्च पदों पर काम करते थे। उनकी एक बेटी थी, नाम था अनन्या, जो उस वक्त सिर्फ छह साल की थी। दोनों माता-पिता इतने व्यस्त रहते थे कि अनन्या के पास घर में बात करने के लिए मुश्किल से कोई होता था। स्कूल की बस छूटने के बाद, वह अक्सर अकेली गेट के पास बैठी रहती, अपने माता-पिता के घर लौटने का इंतज़ार करती।
एक दिन रामू काका ने देखा कि अनन्या गेट के पास बैठी बुरी तरह रो रही है। उन्होंने पास जाकर पूछा, "बेटा, क्या हुआ?"
"मेरा टिफिन बॉक्स स्कूल में टूट गया," अनन्या ने सिसकते हुए कहा। "मम्मी-पापा को बताऊंगी तो डांटेंगे।"
रामू काका मुस्कुराए। "कोई बात नहीं बेटा, कल मैं तुम्हारे लिए ठीक कर दूंगा।"
अगले दिन, रामू काका सच में उस टूटे हुए टिफिन बॉक्स को अपने औजारों से ठीक करके ले आए। अनन्या की आंखों में जो खुशी थी, उसने रामू काका के दिल में एक अजीब सा अपनापन जगा दिया।
उस दिन के बाद से, यह सिलसिला चलता रहा। अनन्या स्कूल से आकर सीधे रामू काका की छोटी सी चौकी पर बैठ जाती, जब तक उसके माता-पिता घर नहीं लौटते। रामू काका उसे कहानियां सुनाते, उसका होमवर्क करवाने की कोशिश करते, और कभी-कभी अपनी जेब से उसके लिए टॉफी खरीद लाते।
मेहरा दंपति को यह बात पता थी, और शुरू में उन्हें कोई एतराज़ नहीं था — आखिर, उनकी बेटी सुरक्षित थी और खुश भी। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि अनन्या रामू काका से जितनी बातें करती थी, उतनी उनसे नहीं करती थी।