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अधूरा सफर

By King of story · 5 min read

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अधूरा सफर

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बचपन के प्यार की एक अनकही कहानी अधूरा सफर, जहां शब्द नहीं कहे गए पर एहसास कभी नहीं मिटे।एक भावुक और अनोखी हिंदी प्रेम कहानी

बारिश की एक बूंद खिड़की के शीशे पर टपकी, फिर दूसरी, फिर तीसरी। अर्जुन बालकनी में खड़ा वही पुराना गाना सुन रहा था, जो कभी उसने और मीरा ने साथ बैठकर सुना था।

गांव के उस छोटे से स्कूल में, जहां छत से बारिश टपकती थी और बेंच पर स्याही के दाग थे, वहीं पहली बार अर्जुन ने मीरा को देखा था। सात साल की उम्र में प्यार का मतलब समझ नहीं आता, बस इतना पता था कि टिफिन में अगर मीरा के हाथ का अचार मिल जाए, तो दिन बन जाता है।

मीरा शरारती थी, अर्जुन शांत। पर दोनों की जोड़ी स्कूल में मशहूर थी। मास्टरजी भी हंसते हुए कहते, "ये दोनों तो जन्म-जन्म के साथी लगते हैं।"

समय बीता। बचपन की गलियां छूट गईं, पर दोस्ती नहीं छूटी। कॉलेज में कदम रखते ही अर्जुन को एहसास हुआ कि जो भाव उसके दिल में मीरा के लिए है, वो सिर्फ दोस्ती नहीं। पर वो डरता था — कहीं इस इज़हार से दोस्ती ही न टूट जाए।

एक शाम, नदी किनारे बैठे, मीरा ने पूछा था, "अर्जुन, तुझे कभी किसी से प्यार हुआ है?"

अर्जुन का दिल जोर से धड़का। उसने आसमान की तरफ देखा, फिर हिम्मत जुटाकर कहा, "हां... बचपन से।"

मीरा हंस पड़ी, "अच्छा! कौन है वो खुशकिस्मत?"

अर्जुन चुप रहा। शब्द गले में अटक गए। और वो पल यूं ही गुजर गया, जैसे रेत मुट्ठी से फिसल जाती है।

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