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रिया मेहता का संदेह
भाग 1: आमना-सामना
रिया मेहता अर्जुन के करीब आ रही थीं। उसने अर्जुन की पुरानी ज़िंदगी की जाँच की। उसकी पत्नी की मौत की जाँच की। उसकी बेटी के बाल गृह में भेजे जाने की जाँच की।
और फिर एक रात, रिया अर्जुन के सामने आ खड़ी हुईं।
"अर्जुन शर्मा," रिया ने कहा। "मैं जानती हूँ तुम कौन हो।"
अर्जुन ने उन्हें देखा। कोई डर नहीं। कोई घबराहट नहीं।
"तो फिर गिरफ्तार क्यों नहीं करती?"
"क्योंकि मैं समझती हूँ तुम्हारा दर्द।" रिया की आवाज़ में एक अजीब सी नरमी थी। "मेरे पिता भी एक ईमानदार अधिकारी थे। उन्हें भी इस सिस्टम ने मार दिया।"
"तो फिर मेरे साथ क्यों नहीं आती?"
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