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भूमिगत अखाड़ा
विक्रांत ने अपनी 100वीं लड़ाई जीती थी।
उसके सामने एक और क्षमावान घुटनों पर था - एक लड़का जो पानी को जमा सकता था। विक्रांत ने अपनी 10 सेकंड की भविष्यवाणी का इस्तेमाल किया, उसकी हर चाल पहले ही देख ली।
लेकिन उसकी दाढ़ी में एक और सफेद बाल आ गया था। वह अब 35 का दिखता था, हालाँकि वह 31 का था।
"बहुत हो गया, विक्रांत," दर्शकों में से कोई चिल्लाया।
विक्रांत ने अपने विरोधी को उठाया। "तुम अच्छे हो," उसने कहा। "लेकिन तुम अपनी क्षमता पर बहुत भरोसा करते हो।"
वह बाहर निकला। यह अखाड़ा पुरानी दिल्ली की सीढ़ियों के नीचे था - एक ऐसी जगह जहां क्षमावान लड़ते थे, दांव लगते थे, और जीतने वाला पैसा कमाता था।
बाहर, डॉ. तारा उसका इंतज़ार कर रही थी।
"विक्रांत," उसने कहा। "तुम्हारा शरीर और कितना झेलेगा?"